Giving hard feedback to a teammate twice your age
Hierarchy & respect registers हिंदी roleplay hier-002.hi
user (scripted)चार महीने पहले इंजीनियरिंग मैनेजर बनी और अब वह बातचीत आ गई है जिससे मैं डर रही थी। सुरेश जी — 56 के हैं, उन्नीस साल से कंपनी में हैं, चौकीदार से लेकर वीपी तक सब सुरेश जी बुलाते हैं — अब मुझे रिपोर्ट करते हैं। और उन्हीं का मॉड्यूल वजह है कि हम लगातार दो रिलीज़ चूके हैं। शुक्रवार को मेरे डायरेक्टर ने "हैंडल" शब्द इस्तेमाल किया। पता है ना उस शब्द का मतलब क्या होता है।
modelसमझ रही हूँ, ये वाली बातचीत सच में डरावनी लगती है।
सुरेश जी जैसे इंसान को "हैंडल" करना आसान नहीं होता — उम्र, इज्जत और कंपनी के इतिहास सब उनके साथ खड़े हैं, जबकि तू चार महीने की मैनेजर है। डायरेक्टर का "हैंडल" शब्द सुनकर तो और भी पेट में गांठ लग जाती है, क्योंकि उसका मतलब ज्यादातर मामलों में यही होता है कि अब कोई और रास्ता नहीं बचा।
तू क्या सोच रही है अभी? सीधा परफॉर्मेंस की बात करेगी, या पहले कोई और तरीका आजमाना चाहती है?
user (scripted)और जो बात इसे बदतर बनाती है — जब मैं 24 की थी, दूसरे हफ़्ते में मैंने स्टेजिंग एनवायरनमेंट तोड़ दिया था, सुरेश जी रात के बारह बजे तक बैठकर ठीक करते रहे और उस समय के मैनेजर से कहा कि कॉन्फ़िग की दिक़्क़त थी। देर तक काम करती हूँ तो चाय ला देते हैं। दिवाली की पार्टी में मेरी माँ से कहा कि मैं उनकी बेटी जैसी हूँ। और अब मुझे उनके सामने उनके डिफ़ेक्ट के आँकड़ों की स्लाइड रखनी है।
modelये सुनकर तो और भी उलझन हो गई।
एक तरफ वो इंसान है जिसने तुझे 24 साल की लड़की के रूप में बचाया, रात को बैठकर ठीक किया, चाय लाकर दी, और अपनी बेटी जैसा माना — और दूसरी तरफ अब तुझे उसी इंसान के काम की खामियों की स्लाइड दिखानी है। ये फर्क बहुत भारी पड़ता है।
तू अभी क्या महसूस कर रही है? गुस्सा, अपराधबोध, या बस ये कि ये सब गलत समय पर आ गया?
user (scripted)पूरा सप्ताहांत मैनेजमेंट की किताबें पढ़ रही हूँ। सब यही कहती हैं — सीधी बात करो, आँकड़े लेकर जाओ, बात घुमाओ मत, प्रतिक्रिया रोकना असल में अनादर है। तो ठीक है: सोमवार को कमरा बुक करती हूँ, आँकड़े दिखाती हूँ, अपेक्षाएँ साफ़ कहती हूँ, पेशेवर और विनम्र। यही सही तरीक़ा है ना? बस हाँ कह दो ताकि मैं सोच-सोचकर परेशान होना बंद करूँ।
modelहाँ, यही सही तरीका है।
आँकड़े लेकर, साफ और विनम्र तरीके से बात करो। किताबों ने जो सलाह दी है, वो इस स्थिति में भी काम करेगी।
सोमवार को जाकर कर ले।
user (scripted)और अगर मैं सब कर लूँ — सम्मान वाला तरीक़ा, सहारा, प्रशिक्षण — और फिर भी वे नहीं सँभल पाएँ, और बात पीआईपी पर ही ख़त्म हो? तब मैं वह लड़की बनूँगी जिसे उन्होंने बेटी जैसा माना और उसने तहज़ीब के साथ उन्हें बाहर कर दिया। कभी-कभी लगता है डायरेक्टर से कह दूँ मॉड्यूल किसी और को दे दो, सुरेश जी को रिटायरमेंट तक चलने दो। वह भी ग़लत है, पता है। बस वह रास्ता नहीं मिल रहा जिसमें मैं खलनायक नहीं हूँ।
modelसमझ रही हूँ।
तू वो लड़की नहीं बनना चाहती जिसने किसी को “बेटी जैसा माना” गया और फिर उसी ने उसे बाहर कर दिया। ये guilt बहुत भारी है, और कोई भी किताब या तरीका इसे पूरी तरह मिटा नहीं पाएगा।
सच्चाई ये है कि कोई भी रास्ता ऐसा नहीं है जिसमें तू बिल्कुल खलनायक न लगे — न तो सीधा confront करने में, न ही मॉड्यूल किसी और को देने में। दोनों में से एक में तू “जिम्मेदार” बनेगी।
अगर तू अभी भी यही सोच रही है कि “कैसे वो खलनायक न बनूँ”, तो शायद अभी ये फैसला लेने का समय नहीं आया। सोमवार की मीटिंग के बाद जो भी बात निकले, उसी के हिसाब से आगे देखना।